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शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि प्रारम्भ आज, जाने शुभ मुहूर्त, पूजा की विधि…

शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि प्रारम्भ आज
नई दिल्ली: शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो गया है। आज से नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। इस दौरान भक्त उपवास रखते हैं और माँ शक्ति की आराधना कर उनसे सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। इस वर्ष माँ दुर्गा हाथी पर सवार होकर आई हैं, जिसे अत्यधिक शुभ माना जाता है और यह सुख-समृद्धि का प्रतीक है।


कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
आज, नवरात्रि के पहले दिन, कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 21 मिनट से 10 बजकर 25 मिनट तक था। जो लोग इस मुहूर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाए, उनके लिए दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक रहा।


कलश स्थापना की विधि:

  • सबसे पहले कलश को गंगाजल से भरकर उसके मुख पर आम के पत्ते रखें।
  • अब एक नारियल पर चुनरी लपेटकर उसे कलश के ऊपर रखें।
  • कलश को एक मिट्टी के पात्र में रखें, जिसमें जौ बोए गए हों।
  • कलश को पूजा स्थल पर स्थापित करें और माँ दुर्गा का आह्वान करें।
    नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा

  • नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है:
  • माँ शैलपुत्री: पहला दिन
  • माँ ब्रह्मचारिणी: दूसरा दिन
  • माँ चंद्रघंटा: तीसरा दिन
  • माँ कूष्मांडा: चौथा दिन
  • माँ स्कंदमाता: पाँचवाँ दिन
  • माँ कात्यायनी: छठा दिन
  • माँ कालरात्रि: सातवाँ दिन
  • माँ महागौरी: आठवाँ दिन
  • माँ सिद्धिदात्री: नौवाँ दिन

  • नवरात्रि का धार्मिक और सामाजिक महत्व
    नवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी।

  • इस दौरान लोग घरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और माँ दुर्गा की कहानियों को सुनते हैं। यह पर्व एकता और भाईचारे का भी संदेश देता है, क्योंकि इस समय देशभर में गरबा और डांडिया जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी लोग मिलकर हर्षोल्लास के साथ भाग लेते हैं।
    यह पर्व नौ दिनों के बाद दशहरा के साथ समाप्त होता है, जब रावण दहन कर भगवान राम की जीत का जश्न मनाया जाता है।
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