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​शासकीय आर.बी.आर. एन.ई.एस. पी.जी. कॉलेज, जशपुर में दो दिवसीय ‘विद्यार्थी शोधशाला’ का भव्य शुभारंभ

शासकीय राम भजन राय एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जशपुरनगर में 13 मार्च 2026 से छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार एवं राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान द्वारा वित्त पोषित दो दिवसीय ‘विद्यार्थी शोधशाला’ का भव्य शुभारंभ किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करना और उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अवगत कराना है। विशेष उल्लेखनीय है कि यह पूरी कार्यशाला हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) पर आयोजित की गई, जिससे विद्यार्थियों को तकनीक के माध्यम से विशेषज्ञों से जुड़ने का अवसर मिला। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में स्वागत उद्बोधन देते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अमरेंद्र सिंह ने शोधशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ-साथ शोध का विशेष महत्व है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी किसी विषय का गहन अध्ययन कर समाज की समस्याओं के समाधान में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को इस सत्र से अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, अंबिकापुर के पूर्व कुलपति डॉ. पी. पी. सिंह थे। उन्होंने अपने प्रभावी उद्बोधन में स्पष्ट किया कि अनुसंधान किसी पर थोपा गया कार्य नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति की जिज्ञासा, खोज की भावना और निरंतर सीखने की इच्छा से प्रारंभ होता है। प्रथम तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञ डॉ. फरहान रहमान (रांची विश्वविद्यालय) ने शोध की मूलभूत अवधारणाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। द्वितीय सत्र में कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के एसोसिएट प्रोफेसर राजेंद्र भारती ने ‘प्रकल्पना निर्माण’ के संबंध में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
तृतीय तकनीकी सत्र के विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र ब्रह्मे (प्राध्यापक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर) ने अनुसंधान में आने वाली चुनौतियों, शैक्षणिक ईमानदारी, शोध कार्य में मौलिकता, सत्यता और नैतिकता के महत्व पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को नकल से बचने और स्वयं के विचारों एवं तथ्यों को प्रमाणित रूप में प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसी क्रम में चतुर्थ रिसोर्स पर्सन डॉ. विजय प्रकाश (विभागाध्यक्ष, कॉमर्स, जमशेदपुर) ने शोध परियोजना लेखन, विषय चयन, शोध पद्धति, डेटा संग्रहण, विश्लेषण तथा लेखन की तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। कार्यशाला के पहले दिन विद्यार्थियों ने बड़ी उत्सुकता के साथ विशेषज्ञों के विचारों को आत्मसात किया।


इस सफल आयोजन में आभार प्रदर्शन कार्यशाला के संयोजक डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कार्यक्रम के संपादन एवं व्यवस्था में सचिव प्रोफेसर डी.आर. राठिया, डॉ. सरिता निकुंज, डॉ. ज्योति तिर्की, डॉ. यू.एन. लकड़ा, प्रो. के.आर. भगत, डॉ. जे.पी. कुजूर, प्रो. एस.ई.जी. लकड़ा, सुश्री कीर्ति किरण केरकेट्टा, श्री प्रवीण चंद सतपती, डॉ. हरिकेश कुमार, डॉ. आइलिन एक्का, प्रिंसी कुजूर, अंजीता कुजूर और श्री लाईजिन मिंज की सक्रिय सहभागिता रही। श्रीमती रिजवाना खातून एवं गौतम कुमार सूर्यवंशी द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया गया। इस कार्यशाला में विभिन्न संकायों के 200 प्रत्यक्ष एवं 600 से अधिक आभासी पटल के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हुई, जिसके दूसरे दिन भी अनुसंधान पर आधारित व्यावहारिक तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।

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