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जशपुर में वनोपज आधारित उद्योगों से सशक्त होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, युवाओं को मिला स्वरोजगार का प्रशिक्षण


रविंद्र यादव, जशपुर। जिले में ग्रामीण आजीविका को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII) के संयुक्त तत्वावधान में कुनकुरी, पत्थलगांव और बगीचा विकासखंडों में विशेष सेक्टर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यह पूरा कार्यक्रम ‘रैंप’ (RAMP) योजना के अंतर्गत संचालित किया गया, जिसका मुख्य ध्येय लघु वनोपज पर आधारित लघु उद्योगों को बढ़ावा देना और स्थानीय संसाधनों के कुशल उपयोग से आय के स्थायी स्रोत निर्मित करना है।


प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वनोपज के संग्रहण से लेकर उनके प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और अंतिम विपणन तक की पूरी श्रृंखला की व्यावहारिक जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से जशपुर की प्रमुख वन संपदा जैसे चिरौंजी, महुआ और कटहल (जैकफ्रूट) पर आधारित प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते हुए बताया कि कैसे छोटे स्तर पर उद्योग शुरू करके उसे बड़े बाजार से जोड़ा जा सकता है और उत्पादों की गुणवत्ता सुधार कर बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।


इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला उद्योग केंद्र, जशपुर के श्री मनीष भगत ने जिले की प्राकृतिक समृद्धि पर जोर देते हुए कहा कि जशपुर में लघु वनोपज आधारित उद्योगों की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि स्थानीय युवाओं को सही दिशा और तकनीकी प्रशिक्षण मिले, तो वे अपने ही क्षेत्र में सफल उद्यमी बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकते हैं। कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय युवाओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की, जिन्होंने इस प्रशिक्षण को अपने आत्मविश्वास और नई सोच के लिए मील का पत्थर बताया। आयोजकों का लक्ष्य इस कौशल विकास के माध्यम से न केवल रोजगार सृजन करना है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में आर्थिक स्थिरता लाना भी है।

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