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सोगड़ा आश्रम में प्रकृति का चमत्कार: हजारों लाल फूलों के बीच खिला दुर्लभ ‘पीला पलाश’

जशपुर: छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है। इसी कड़ी में, जशपुर स्थित प्रसिद्ध सोगड़ा आश्रम एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। आश्रम परिसर में अत्यंत दुर्लभ ‘पीला पलाश’ खिलने से न केवल भक्त, बल्कि प्रकृति प्रेमी और वनस्पति शास्त्री भी अचंभित हैं।

हजारों में एक होता है यह दुर्लभ वृक्षआम तौर पर फाल्गुन के महीने में जंगल लाल और नारंगी पलाश के फूलों से लदे नजर आते हैं, जिन्हें ‘जंगल की आग’ (Flame of the Forest) कहा जाता है। लेकिन सोगड़ा आश्रम में खिला यह पीला पलाश प्रकृति का एक दुर्लभ उपहार है।

वनस्पति विज्ञान की दृष्टि में इसे Butea monosperma var. lutea कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हजारों लाल पलाश के पेड़ों के बीच कहीं जाकर प्राकृतिक रूप से एक पीला पलाश जन्म लेता है।धार्मिक आस्था: ‘लक्ष्मण पलाश’ के रूप में पूजा सोगड़ा आश्रम में इस फूल के खिलने को एक शुभ संकेत और चमत्कार माना जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:इस दुर्लभ फूल को ‘लक्ष्मण पलाश’ के नाम से जाना जाता है।इसे सुख, शांति और अखंड समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।आश्रम में आने वाले श्रद्धालु इसे साक्षात दैवीय कृपा मानकर इसकी पूजा-अर्चना कर रहे हैं।आकर्षण का केंद्र बना आश्रमसोगड़ा आश्रम हमेशा से ही दुर्लभ वनस्पतियों और आध्यात्मिक शांति का केंद्र रहा है।

आश्रम के वातावरण में इस सुनहरे पीले फूल ने चार चाँद लगा दिए हैं। लोग इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरों में कैद करने और इस ‘चमत्कारी’ फूल के दर्शन करने के लिए पहुँच रहे हैं।वनस्पति शास्त्रियों के अनुसार, जेनेटिक म्यूटेशन (आनुवंशिक परिवर्तन) के कारण इसका रंग लाल के बजाय पीला हो जाता है, जो इसे अद्वितीय बनाता है। जशपुर की पावन धरा पर इस दुर्लभ वनस्पति का होना यहाँ की समृद्ध जैव-विविधता को भी दर्शाता है।

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