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पति की सिलपत्थर से हत्या कर शव ट्रॉली बैग में छिपाने वाली पत्नी को उम्रकैद

दुलदुला के भिंजपुर हत्याकांड में कुनकुरी न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला; 258 दिनों के भीतर आरोपी महिला को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा

कुनकुरी (जशपुर)।न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, कुनकुरी के विद्वान न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन की अदालत ने अपने पति की निर्मम हत्या करने और साक्ष्य छिपाने के सनसनीखेज मामले में आरोपी पत्नी मंगरीता भगत (45 वर्ष) को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।यह पूरा मामला जशपुर जिले के थाना दुलदुला क्षेत्र अंतर्गत ग्राम भिंजपुर का है।

न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 103(1) के तहत आरोपी महिला को आजीवन कारावास व 1,000 रुपये अर्थदंड (अदा न करने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास) तथा धारा 238(क) के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास व 500 रुपये अर्थदंड (अदा न करने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास) की सजा से दंडित किया है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।विवाद के बाद सिलपत्थर से किया था वार अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक (AGP) श्रीमती पुष्पा सिंह ने पक्ष रखा।

घटना 07 नवंबर 2025 की रात लगभग 10 से 11 बजे के बीच की है। घरेलू विवाद के दौरान आरोपी मंगरीता भगत ने अपने पति संतोष भगत के सिर पर भारी-भरकम सिलपत्थर (16.44 किग्रा) से जोरदार वार कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद अपराध छिपाने की नीयत से महिला ने फर्श पर बिखरे खून को साफ किया और पति के शव को एक ट्रॉली बैग के अंदर बंद कर दिया।

सराहनीय विवेचना और वैज्ञानिक साक्ष्य बने आधारमामले की त्वरित और सटीक विवेचना दुलदुला थाना प्रभारी निरीक्षक कृष्ण कुमार साहू एवं उनकी पुलिस टीम द्वारा की गई। विवेचना अधिकारी ने घटनास्थल से वीडियोग्राफी, ‘ई-साक्ष्य ऐप’ के जरिए साक्ष्य संकलन और FSL (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट तैयार कराई। जब्त सिलपत्थर और अन्य वस्तुओं पर मिले मानव रक्त की पुष्टि FSL रिपोर्ट (प्रदर्श पी-27) में हुई। वैज्ञानिक व चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने धारा 109 साक्ष्य अधिनियम के तहत अभियुक्ता को दोषी माना।

मामले की समय-सीमा (Timeline):07.11.2025: घटना कारित09.11.2025: FIR व मर्ग दर्ज13.11.2025: अभियुक्ता गिरफ्तार30.12.2025: न्यायालय में चालान प्रस्तुत28.07.2026

अंतिम फैसला घोषित न्यायालय की तल्ख टिप्पणी:फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन ने कहा — “पति की हत्या कर शव ट्रॉली बैग में डालना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह हमारे सामाजिक मूल्यों के गंभीर पतन का संकेत है।”पुलिस की त्वरित चार्जशीट और ठोस वैज्ञानिक सबूतों की बदौलत केवल 258 दिनों की अभिरक्षा अवधि के भीतर पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है।

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