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लोभ, अहंकार और संवादहीनता से टूट रहे हैं परिवार-पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम

वाराणसी। पूज्य गुरुदेव ने कहा कि आज परिवारों के विघटन, दाम्पत्य जीवन में बढ़ते तनाव और सामाजिक असंतोष का प्रमुख कारण लोभ, अहंकार तथा संवादहीनता है। उन्होंने कहा कि केवल महिलाओं को दोषी ठहराना उचित नहीं, बल्कि पति, परिवार और समाज सभी को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि विवाह के बाद बेटी अपना घर-परिवार छोड़कर नए परिवेश में आती है। ऐसे में उसे सम्मान, सहयोग और अपनापन मिलना चाहिए, वहीं नववधू को भी नए परिवार के अनुरूप स्वयं को ढालने का प्रयास करना चाहिए। दोनों पक्षों की संवेदनशीलता से ही परिवार सुखी और सुदृढ़ बन सकता है।

पूज्य गुरुदेव ने कहा कि आज अधिकांश पारिवारिक विवादों की जड़ धन का लोभ है। इसी स्वार्थपूर्ण सोच के कारण संयुक्त परिवार बिखर रहे हैं और माता-पिता वृद्धावस्था में उपेक्षा का जीवन जीने को विवश हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक धन संपत्ति नहीं, बल्कि अच्छे कर्म, श्रेष्ठ संस्कार और महापुरुषों द्वारा दिखाया गया मार्ग है।

उन्होंने कहा कि ईश्वर ने मनुष्य को बुद्धि और विवेक दिया है, इसलिए किसी भी बात का अंधानुकरण नहीं, बल्कि समय और परिस्थिति के अनुरूप विवेकपूर्ण निर्णय लेना चाहिए। कर्मफल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है, इसलिए जीवन में सदाचार और सेवा का मार्ग अपनाना आवश्यक है।

पूज्य गुरुदेव ने कहा कि मोह-माया का त्याग करने का अर्थ घर-परिवार छोड़ना नहीं, बल्कि मन के विकारों-लोभ, क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष का परित्याग करना है। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज में संवाद, विश्वास और पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि शंका संबंधों को गहराई से प्रभावित करती है। उन्होंने उपस्थित जनों से महापुरुषों की वाणी का अनुसरण करते हुए मानवता, सेवा और सदाचार को जीवन में अपनाने तथा आने वाले समय की चुनौतियों के लिए मानसिक और आध्यात्मिक रूप से तैयार रहने का आह्वान किया।

अंत में उन्होंने सभी के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करते हुए अपनी वाणी को विराम दिया।ये बातें गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन 30 जुलाई 2026 आयोजित सायंकालीन महिला एवं युवा संयुक्त सम्मेलन में गोष्ठी में माताओं और युवाओं को संबोधित करते हुए श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने कहीं।

गोष्ठी की अध्यक्षता प्रयागराज की दुर्गवाती चौधरी जी ने किया। अन्य वक्ताओं में संस्था के उपाध्यक्ष सुरेश सिंह, संतोष मिश्रा, प्रकाश पृथु, गोपाल शंकर श्रीवास्तव, सोनी, स्वीटी, शैलजा शाहदेव और स्वेता श्रीवास्तव थे । नीलिमा सिंह और कुमारी पूर्णिमा ने भजन गया। धन्यवाद ज्ञापन संस्था के मंत्री डॉ. एस. पी. सिंह ने किया तथा संचालन सुष्मिता ने कियाइससे पूर्व श्री सर्वेश्वरी समूह का 65वाँ अखिल भारतीय वार्षिक अधिवेशन सुबह 8 बजे प्रारंभ हुआ, जिसमें संस्था द्वारा गत् गुरुपूर्णिमा से इस गुरुपूर्णिमा तक किए गये जन-कल्याणकारी कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण संस्था के मंत्री डॉ. एस. पी. सिंह और प्रचार मंत्री पारसनाथ यादव ने प्रस्तुत किया। साथ संस्था के दिवंगत हुए सदस्यों कि सूची पढ़ी गई और दो मिनट मौन रखकर दिवंगत आत्माओं के शांति व सद्गति की प्रार्थन ईश्वर से की गई। इस अवसर पर श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने संस्था के पदाधिकारियों को उत्साहित और प्रेरित करते हुए कहा कि समाज भाषणों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन और आचरण से प्रेरणा लेता है।

किसी भी संस्था की वास्तविक प्रगति उसके पदाधिकारियों के चरित्र पर निर्भर करती है। नई पीढ़ी को संस्था के संस्कारों से जोड़ना प्रत्येक परिवार की जिम्मेदारी है। निष्क्रिय व्यक्ति को सहयोग नहीं मिलता, कर्मशील व्यक्ति के साथ समाज स्वयं जुड़ता है। समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता; जीवन का प्रत्येक क्षण लोककल्याण के लिए समर्पित होना चाहिए।

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