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विवेकानंद के विचारों की गूंज से गूंजा जशपुर, अखिलेंद्र मिश्रा के अभिनय ने बांधा समांजशरंग नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन आध्यात्म, राष्ट्रवाद और रंगमंच का सशक्त संगम


जशपुरनगर। जशरंग राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को वशिष्ट कम्युनिटी हॉल में रंगमंच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली सशक्त अभिव्यक्ति है। छत्तीसगढ़िया क्लाऊड द्वारा आयोजित इस महोत्सव में प्रख्यात अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा ने अपने एकल नाटक ‘स्वामी विवेकानंद का पुनर्पाठ’ के माध्यम से दर्शकों को आध्यात्मिक और वैचारिक यात्रा पर ले जाते हुए भाव-विभोर कर दिया।


मंच पर अकेले खड़े मिश्रा ने जिस ओज, ऊर्जा और आत्मीयता के साथ स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व को जीवंत किया, उसने पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके संवादों में जहां आध्यात्मिक ऊंचाई का स्पर्श था, वहीं राष्ट्रप्रेम की प्रखर चेतना भी उतनी ही मुखर दिखाई दी। विवेकानंद के जीवन-संघर्ष, युवाओं के प्रति उनका आह्वान और भारतीय संस्कृति के गौरव को उन्होंने इतने प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया कि कई बार सभागार तालियों से गूंज उठा, तो कई क्षणों में पसरा सन्नाटा प्रस्तुति की गहराई का साक्षी बना।नाटक के जरिए यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि वर्तमान समय में विवेकानंद के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। मिश्रा ने अपने सशक्त अभिनय से केवल एक चरित्र का मंचन नहीं किया, बल्कि एक विचारधारा को जीवंत कर दर्शकों के मन-मस्तिष्क में गहरी छाप छोड़ी।


कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती कला केंद्र की छात्राओं की आकर्षक नृत्य प्रस्तुति से हुई। पारंपरिक वेशभूषा, सधे हुए कदम और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने माहौल को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।जशरंग महोत्सव का यह दिन हर मायने में यादगार बन गया। एक ओर युवा प्रतिभाओं की झलक देखने को मिली, तो दूसरी ओर एक अनुभवी कलाकार ने अपनी कला से यह सिद्ध कर दिया कि रंगमंच आज भी समाज को सोचने, समझने और बदलने की प्रेरणा देने की अद्भुत क्षमता रखता है।

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