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शुभ-लाभ का महापर्व धनतेरस आज: धन्वंतरि जयंती पर आरोग्य की कामना सोना-चांदी खरीदने के लिए ये हैं सबसे उत्तम मुहूर्त


जशपुर नगर / 18 अक्टूबर 2025:
समृद्धि और आरोग्य का पर्व धनतेरस आज, शनिवार (18 अक्टूबर) को पूरे देश में पारंपरिक श्रद्धा और अभूतपूर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाए जाने वाले इस त्योहार ने दिवाली के पाँच दिवसीय उत्सव की शुरुआत कर दी है।
देशभर के बाजारों में सुबह से ही ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे व्यापारियों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है। व्यापारियों के संगठन के अनुसार, सोना-चांदी, बर्तन, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बंपर खरीदारी होने की उम्मीद है, और आज का कुल कारोबार 60 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकता है।


बाजारों में ऐतिहासिक रौनक

  • सोने-चांदी की चमक: धनतेरस पर सोना खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर होने के बावजूद, सर्राफा बाजारों में ग्राहकों की भीड़ कम नहीं हुई है। निवेशक और आम ग्राहक दोनों ही सोने के सिक्के, बार और आभूषणों की खरीदारी कर रहे हैं।
  • बर्तन और वाहन: पीतल और तांबे के नए बर्तन खरीदने की परंपरा के कारण बर्तन बाजारों में भी जबरदस्त उछाल है। इसके अलावा, शुभ मुहूर्त में डिलीवरी लेने के लिए दोपहिया और चारपहिया वाहनों की एडवांस बुकिंग ने ऑटोमोबाइल सेक्टर को बड़ी राहत दी है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और गृह सज्जा: शुभता के प्रतीक के तौर पर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं, झाड़ू और नए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की बिक्री भी चरम पर है। ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के तहत भारतीय हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

  • दुर्लभ संयोग और पूजा का शुभ मुहूर्त
    ज्योतिष गणना के अनुसार, इस साल धनतेरस का पर्व अत्यंत खास है क्योंकि यह शनि त्रयोदशी और शनि प्रदोष व्रत के शुभ संयोग में मनाया जा रहा है।
  • लक्ष्मी-कुबेर पूजा: शाम को प्रदोष काल में माता लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाएगी। पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 15 मिनट से रात 8 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस दौरान वृषभ काल भी रहेगा, जिसे स्थिर लग्न माना जाता है, मान्यता है कि इस समय की गई पूजा से घर में लक्ष्मी का वास स्थायी हो जाता है।
  • खरीदारी के मुहूर्त: खरीदारी के लिए दिनभर कई शुभ चौघड़िया मुहूर्त हैं। सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 8 बजकर 50 मिनट से 10 बजकर 33 मिनट तक (अमृत काल) और फिर दोपहर 1 बजकर 51 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक (लाभ-उन्नति) है।

  • पर्व का धार्मिक महत्व
    धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए यह दिन स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए भी महत्वपूर्ण है।
    शाम के समय, घरों के मुख्य द्वार पर यमदीप दान की परंपरा निभाई जाएगी, जिसमें अकाल मृत्यु से परिवार की रक्षा के लिए यमराज को समर्पित एक दीया जलाया जाता है।
    धनतेरस का यह महापर्व न केवल आर्थिक समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह अच्छे स्वास्थ्य, सद्भाव और आने वाले दिवाली के उल्लास को भी दर्शाता है। देशभर में लोग अपनों के लिए सुख-समृद्धि की कामना करते हुए त्योहार मना रहे हैं।
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