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​ जशपुर : लोरो घाटी शिव मंदिर में आस्था के साथ डिजिटल क्रांति: जेब में कैश न होने पर भी श्रद्धालु कर सकेंगे ‘डिजिटल अर्पण, आरपीआई नेता विजय गुप्ता ने किया शुभारंभ…..

जशपुरनगर। आस्था और आधुनिक तकनीक के खूबसूरत समन्वय के साथ जशपुर की प्रसिद्ध लोरो घाटी स्थित प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी डिजिटल सुविधा की शुरुआत की गई है। अब मंदिर में आने वाले भक्त जेब में नकदी (कैश) न होने पर भी बेहद आसानी से QR कोड के माध्यम से बाबा भोलेनाथ को अपनी श्रद्धानुसार दान अर्पित कर सकेंगे। इस डिजिटल व्यवस्था यानी ई-दान सुविधा का विधिवत उद्घाटन इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में किया गया।

समाजसेवी विजय गुप्ता ने फीता काटकर किया शुभारंभ

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिले के प्रख्यात समाजसेवी एवं आरपीआई (RPI-आठवले) के राष्ट्रीय सचिव विजय गुप्ता शामिल हुए, जिन्होंने पुष्पों से सजे फीते को काटकर इस क्यूआर कोड आधारित डिजिटल दान व्यवस्था का शुभारंभ किया। इस अवसर पर क्षेत्र के युवा समाजसेवी, पूर्व जनपद सदस्य तथा आरपीआई (आठवले) छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष बिपीन सिंह भी अपने सहयोगियों और कार्यकर्ताओं के साथ विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कैश न होने पर मायूस नहीं होंगे श्रद्धालु

अक्सर देखा जाता था कि कई श्रद्धालु प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर और सदाबहार फूलों की खुशबू से महकती लोरो घाटी के इस प्राचीन मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते थे, लेकिन जेब में नकदी न होने के कारण चाहकर भी दान नहीं कर पाते थे। मंदिर प्रबंधन और अतिथियों द्वारा शुरू की गई इस नई व्यवस्था से भक्तों की यह समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो गई है और अब हर भक्त अपने मोबाइल से पारदर्शिता और सरलता के साथ डिजिटल अर्पण कर सकेगा। ई-दान सुविधा के शुभारंभ के साथ ही कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाने और मंदिर के समग्र विकास की रूपरेखा पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

धार्मिक स्थलों पर आधुनिकता और पारदर्शिता का संगम

इस मौके पर उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय के साथ हमारे धार्मिक स्थलों पर भी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार होना बेहद आवश्यक है। यह डिजिटल दान व्यवस्था न केवल श्रद्धालुओं के सफर और दर्शन को सुगम बनाएगी, बल्कि मंदिर के संचालन और विकास कार्यों में भी पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। लोरो घाटी शिव मंदिर में तकनीक और आस्था के इस सुंदर संगम की स्थानीय नागरिकों और दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं ने मुक्त कंठ से सराहना की है।

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