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आधुनिकीकरण की भीड़ में खोई गौरवशाली परंपरा,डॉ. विनय तिवारी के शोध ने अमेराटोली में खोज निकाली असुर जनजाति की विलुप्त होती ‘लौह विरासत….

जशपुरनगर | 02 फरवरी, 2026

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित विकासखंड जशपुर के अंतर्गत आने वाले अमेराटोली क्षेत्र से एक गौरवशाली और वैज्ञानिक इतिहास की झलक सामने आई है। एनईएस कॉलेज के मानवशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विनय तिवारी ने अपने छात्रों के साथ मिलकर एक महीने तक चले गहन शोध के बाद असुर जनजाति की प्राचीन और उन्नत स्वदेशी लौह तकनीक को खोज निकाला है।

इस शोध के दौरान क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्राचीन लौह धातुमल (Iron Slag) के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो इस बात की पुख्ता गवाही देते हैं कि यह क्षेत्र कभी जनजातीय विज्ञान और धातुकर्म का एक प्रमुख केंद्र रहा होगा।

भौगोलिक दृष्टि से छोटा नागपुर पठार का हिस्सा होने के कारण जशपुर हमेशा से समृद्ध जनजातीय संस्कृति का केंद्र रहा है। डॉ. विनय तिवारी के नेतृत्व में की गई इस खोज ने असुर जनजाति की उस विशिष्ट लौह-शिल्प कला को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है, जिसका वर्णन प्रसिद्ध ब्रिटिश मानवशास्त्री वैरियर एल्विन ने अपनी पुस्तक ‘अगरिया’ में विस्तार से किया था। साक्ष्यों के अनुसार, असुर जनजाति के लोग पहाड़ी पर पत्थरों को पिघलाकर लोहा तैयार करते थे और उससे उन्नत किस्म के कृषि उपकरण और औजार बनाया करते थे।

इतिहास की परतों को खोलते हुए डॉ. तिवारी ने राजस्व के 100 साल पुराने अभिलेखों का भी हवाला दिया है, जिनमें पास के ही ‘लोखंडी’ गांव का नाम ‘लौह-खंडी’ दर्ज है। यह इस तथ्य को प्रमाणित करता है कि यहाँ प्राचीन समय में लौह अयस्क प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था। हालांकि, गांव के बुजुर्गों का कहना है कि लगभग 45 साल पहले असुर समुदाय के लोग यहाँ से पलायन कर गए, जिससे यह समृद्ध परंपरा धीरे-धीरे ओझल हो गई।

वर्तमान में इस ऐतिहासिक खोज ने स्थानीय ग्रामीणों और विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। सामाजिक कार्यकर्ता रामप्रकाश पांडेय और गांव के बुजुर्ग सुखदेव राम ने शासन से इस स्थल को संरक्षित करने की पुरजोर मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थल केवल पत्थरों का ढेर नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों के वैज्ञानिक कौशल की एक जीवंत विरासत है। आधुनिकीकरण के दौर में विलुप्त होती इस प्राचीन स्वदेशी तकनीक को यदि आज सहेजा नहीं गया, तो हम भविष्य के लिए अपनी एक महान ऐतिहासिक और तकनीकी पहचान खो देंगे,

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